**शितळा माता पूजन की जाणकारी**
*शितळा माता पूजन की जाणकारी।* शितळा माताकी पूजा या प्रतिवार्षिक पूजा है। इसलीये या पूजा ने भद्रा, अशुभ दिन, वर्ज्य दिन, यमघन्ट, इष्टी जैसा अशुभ योग को कोई संबन्ध नहीं रेवे। होळी से लेकर चेत बदी अमावस तक या पूजा करता आवे। आबार पूजा नहीं कर सक्या तो आगे बेसाग बदी एकम से सप्तमी ने पूजा कर सके। पूजा करण का दिन कडक वार (मंगळवार, शनिवार) नहीं चाहीये। और जीस दिन होळी रेवे वा दिन पूजा करणो नहीं। याने की या साल होळी गुरूवार की थी तो या साल गुरूवारी माता पूजनो नहीं। गोदरी माता पूजन का लिये कोई नियम नहीं। क्यू की शितळा माता पूजा पचे दुजा दिन गोदरी माता पूजनो जरुरी है। मंगळवार ने रसोई बनाकर बुधवारी शितळा माता पूजनो, गुरूवारी गोदरी माता पुजणो। *रसोई* कढई री पुडी साधी कढई री पुडी चरकी / मिशी / कोंडुळो राब चावळ मेथी की भाजी भजा गुलगुला खाजा दहीचावळ केर सांगरी / आलू / गवार/ कांदा री पात (एक कोई भी साग) खेल खिलोणा (मैदा का) बंट ५